लालसोट में शिव-पार्वती विवाह कथा सुन भाव-विभोर हुए श्रद्धालु, राष्ट्रीय संत दिव्य मुरारी बापू ने सुनाया शिव-पार्वती विवाह प्रसंग

लालसोट.शहर के देवी मंदिर के पास स्थित श्री रामकृष्ण गायत्री माता मंदिर परिसर में चल रही श्रीशिवमहापुराण कथा में मंगलवार को शिव-पार्वती विवाह का पावन प्रसंग बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। विवाह उत्सव के प्रसंग के दौरान पूरा कथा स्थल हर-हर महादेव और पार्वती पतये नम के जयघोष से गूंज उठा एवं शिव-पार्वती विवाह कथा सुन सभी श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए। राष्ट्रीय संत दिव्य मुरारी बापू ने कहा कि भगवती पार्वती साक्षात जगदंबा हैं। सारी विद्याएं उन्हीं से प्रकट हुई हैं। अवतार लेकर भी माता ने नामकरण संस्कार और विद्याध्ययन संस्कार की लीला कर यह शिक्षा दी कि जीवन में अध्ययन अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि मनुष्य जीवन की श्रेष्ठता तीन बातों में है – धर्म विशेष, कर्म विशेष और ज्ञान विशेष, जिसके जीवन में धर्म, कर्म और ज्ञान नहीं वह मनुष्य होकर भी पशु के समान है। साहित्य, संगीत और कला से विहीन मनुष्य साक्षात बिना पूंछ और सींग का पशु ही है। कथा प्रसंग में बताया कि देवर्षि नारद जी के मार्गदर्शन में भगवती पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तप किया, जिससे प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें विवाह का वचन दिया और फिर बड़े धूमधाम से शिव-पार्वती विवाह सम्पन्न हुआ। इस मौके पर भगवान शिव-पार्वती के विवाह की सजीव झांकी सजार्ई गई। यजमान उपाध्याय परिवार ने झांकी की पूजा अर्चना की। झांकी देखने के लिए श्रद्धालुओं की होड़ मची रही। गुरुवार को प्रथम पूज्य भगवान गणपति के जन्म के प्रसंग पर पावन कथा सुनाई जाएगी।
