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एमए-बीएड पतासी वाले ने रचा इतिहास: दिन में ठेला, रात को पढ़ाई, दोहरी चुनौती पर पाई फतह , पानीपुरी का ठेला लगाने वाले टिंकू सैनी बने शिक्षक, संघर्ष से सफलता तक का सफर, राजस्थान SST लेवल-2 शिक्षक भर्ती में हुआ चयन

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एमए-बीएड पतासी वाले ने रचा इतिहास: दिन में ठेला, रात को पढ़ाई, दोहरी चुनौती पर पाई फतह , पानीपुरी का ठेला लगाने वाले टिंकू सैनी बने शिक्षक, संघर्ष से सफलता तक का सफर, राजस्थान SST लेवल-2 शिक्षक भर्ती में हुआ चयन

लालसोट। कहते हैं कि यदि इरादे मजबूत हों तो कठिन से कठिन परिस्थितियां भी मंजिल का रास्ता नहीं रोक सकतीं। लालसोट के युवा टिंकू सैनी ने अपनी मेहनत, लगन और आत्मविश्वास के दम पर इस कहावत को सच साबित कर दिखाया है। शहर में “एमए-बीएड पतासी वाला” के नाम से पहचान बनाने वाले टिंकू सैनी का चयन राजस्थान एसएसटी लेवल-2 शिक्षक भर्ती में हुआ है। उनकी सफलता की कहानी आज क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है।

लालसोट के केमला की ढाणी निवासी टिंकू सैनी पुत्र बिरदीचंद सैनी ने एमए और बीएड की पढ़ाई पूरी की, लेकिन लंबे समय तक रोजगार नहीं मिलने के कारण वर्ष 2022 में उन्होंने शहर के कोथून रोड स्थित देवीजी मंदिर के सामने “एमए-बीएड पतासी सेंटर” के नाम से पानीपुरी (पतासी) का ठेला शुरू किया। शिक्षित युवक को ठेला लगाते देख लोग हैरान होते थे और ठेले पर लिखे नाम को पढ़कर अक्सर रुककर उससे इसकी वजह पूछते थे।

टिंकू ने कभी भी हालात को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। दिनभर पानीपुरी बेचकर परिवार की जिम्मेदारियां निभाने के साथ-साथ वे रात को शिक्षक भर्ती परीक्षा की तैयारी में जुट जाते थे। आर्थिक चुनौतियों और सामाजिक दबावों के बावजूद उन्होंने अपने सपनों को जीवित रखा और लगातार मेहनत जारी रखी।

चार वर्षों तक संघर्ष, धैर्य और कठिन परिश्रम के बाद टिंकू की मेहनत रंग लाई और उनका चयन राजस्थान शिक्षक भर्ती परीक्षा में एसएसटी लेवल-2 शिक्षक पद पर हो गया। इससे पहले भी वे चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भर्ती में सफलता हासिल कर चुके हैं, लेकिन उनका लक्ष्य शिक्षक बनना था, जिसे उन्होंने अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति के बल पर हासिल कर लिया। टिंकू सैनी की यह सफलता उन हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों और विपरीत परिस्थितियों के बावजूद अपने सपनों को साकार करने का प्रयास कर रहे हैं। उनकी कहानी यह संदेश देती है कि कोई भी काम छोटा नहीं होता और मेहनत कभी व्यर्थ नहीं जाती। यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और प्रयास निरंतर हों तो सफलता एक दिन जरूर कदम चूमती है। दिन में ठेला, रात को पढ़ाई, दोहरी चुनौती पर पाई फतह

टिंकू की मेहनत को देखते हुए शहर में महात्मा ज्योतिबा फूले लार्ईब्रेरी के संचालक जेपी सैनी ने उन्हे निशुल्क कोचिंग की सुविधा प्रदान की। जेपी सैनी ने बताया कि दिन भर ठेले पर मेहनत करने के बाद टिंकू रात भर उनकी कोचिंग में पढाई करते थेे। यह उनकी कड़ी मेहनत का ही नतीजा था कि शिक्षक बनने से पहले उन्होंने चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भर्ती में भी सफलता प्राप्त की थी, लेकिन उनका लक्ष्य बड़ा था। उन्होंने अपनी तैयारी जारी रखी और आखिरकार राजस्थान शिक्षक भर्ती लेवल 2 में चयनित होकर अपने मास्टर बनने के सपने को सच कर दिखाया। टिंकू ने शिक्षक भर्ती में प्रदेश भर 59 वीं रैंक प्राप्त की है।

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