निर्झरना फर्जी रजिस्ट्री मामले में नया मोड़, कोर्ट ने दिए पुलिस को अग्रिम निष्पक्ष जांच के आदेश, अधूरे व त्रुटिपूर्ण पुलिस अनुसंधान पर कोर्ट सख्त, मुख्य साजिशकर्ताओं की संलिप्तता की गहन जांच के निर्देश

लालसोट. निर्झरना तहसील क्षेत्र में वर्षों पूर्व मृत व्यक्ति को जीवित दर्शाकर करीब 12 बीघा (3.0348 हेक्टेयर) की बेशकीमती कृषि भूमि का फर्जी विक्र्र्रय पत्र पंजीबद्ध कराने के बहुचर्चित मामले में न्यायालय ने पुलिस अनुसंधान की खामियों पर कड़ा रुख अपनाया है। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट क्रम 2 की अदालत ने मामले में पुलिस द्वारा पेश की गई चार्जशीट को अपूर्ण एवं त्रुटिपूर्ण मानते हुए अग्रिम निष्पक्ष अनुसंधान करने का स्पष्ट आदेश दिया है। मामले में झांपदा थाना पुलिस द्वारा मामले की जांच कर न्यायालय में चार्ज शीट पेश की गई थी,जिसके बाद मामले में आरोपी पक्ष की ओर से नमनारायण उर्फ नमो, ब्रजमोहन महावर और रामखिलाड़ी मीणा ने न्यायालय में प्रार्थना पत्र पेश किए। न्यायालय में आरोपी पक्ष की ओर से पैरवी करते हुए हाई कोर्ट के अधिवक्ता कपिल गुप्ता एवं नरेन्द्र जांगिड ने कहा कि पुलिस ने अधूरा और दोषपूर्ण अनुसंधान किया है एवं पुलिस ने वास्तविक मुख्य आरोपियों को बचाने की नीयत से दुर्भावनापूर्वक और आधी-अधूरी जांच की है। 18 जुलाई को अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट क्रम 2 मधु शर्मा ने दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद यह महत्वपूर्ण आदेश दिया हैै, आदेशों में न्यायालय ने माना कि पत्रावली पर उपलब्ध तथ्यों से जांच अधूरी है।
