माता-पिता की सेवा ही समस्त तीर्थों की परिक्रमा
गणेशजी ने दिया श्रेष्ठ आचरण का संदेश- संत दिव्य मोरारी बापू

लालसोट. शहर के कोथून रोड़ पर महाकाली मंदिर के पास स्थित श्री रामकृष्ण गायत्री माता मंदिर में आयोजित नौ दिवसीय श्रीशिवमहापुराण कथा के दौरान शुक्रवार को राष्ट्रीय संत दिव्य मोरारी बापू ने श्रद्धालुओं को भगवान श्रीगणेशजी के विवाह प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया। कथा के दौरान संत दिव्य मोरारी बापू ने भगवान श्रीगणेशजी के विवाह प्रसंग का वर्णन करते हुए बताया कि माता पार्वती और भगवान शिव ने श्रीकार्तिकेय तथा श्रीगणेश से कहा कि जो पृथ्वी की परिक्रमा करके पहले लौटेगा, उसका विवाह पहले होगा। भगवान कार्तिकेय पृथ्वी की परिक्रमा के लिए निकल पड़े, जबकि बुद्धिमान श्रीगणेशजी ने विचार किया कि संतान के लिए माता-पिता ही संपूर्ण पृथ्वी के समान हैं। उन्होंने माता पार्वती और भगवान शिव की परिक्रमा कर उन्हें ही समस्त लोकों और तीर्थों का स्वरूप मान लिया। उनकी बुद्धिमत्ता और श्रद्धा से प्रसन्न होकर भगवान शिव-पार्वती ने उनका विवाह विश्वरूप प्रजापति की पुत्रियों सिद्धि और बुद्धि के साथ संपन्न कराया। बापू ने कहा कि यह प्रसंग हमें सिखाता है कि माता-पिता की सेवा, सम्मान और श्रद्धा ही जीवन का सबसे बड़ा धर्म है। जो संतान माता-पिता का आदर करती है, उसे जीवन में सिद्धि, बुद्धि और सफलता स्वत: प्राप्त होती है।
