मां की हत्या करने वाले बेटे को उम्रकैद, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश गीता पाठक ने गुरुवार को बेटे को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई 50 हजार का जुर्माना भी लगाया

लालसोट। रामगढ़ पचवारा थाना क्षेत्र में मां की हत्या के चर्चित मामले में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, लालसोट श्रीमती गीता पाठक की अदालत ने गुरुवार को आरोपी बेटे को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने आरोपी पर 50 हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया है। जुर्माना जमा नहीं कराने पर उसे एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
अपर लोक अभियोजक अशोक कुमार शर्मा ने बताया कि 13 मार्च 2024 को नापा का बास निवासी गोविन्द शर्मा ने अपनी मां पुष्पा देवी के सिर पर लोहे की मूसली से वार कर हत्या कर दी थी। घटना के बाद आरोपी के पिता भगवान सहाय शर्मा ने रामगढ़ पचवारा थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट में बताया गया कि वह दोपहर में बैंक गए हुए थे। शाम को लौटने पर माता-पिता ने बताया कि गोविन्द ने उन्हें घर से भगा दिया था। कमरे का दरवाजा खोलने पर पत्नी पुष्पा देवी खून से लथपथ मृत अवस्था में पड़ी मिली, जबकि वृद्ध माता-पिता ने गोविन्द पर हत्या का आरोप लगाया।
पुलिस ने मामला दर्ज कर तत्कालीन थानाधिकारी बुद्धिप्रकाश तेपन के नेतृत्व में जांच की और 19 मई 2024 को आरोपी के खिलाफ न्यायालय में आरोप-पत्र पेश किया। विचारण के दौरान अभियोजन पक्ष ने 18 गवाहों के बयान और 9 दस्तावेजी साक्ष्य अदालत में प्रस्तुत किए।
सुनवाई पूरी होने के बाद न्यायालय ने आरोपी गोविन्द शर्मा को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत दोषी ठहराया। अभियोजन पक्ष ने मामले को जघन्य बताते हुए फांसी की सजा देने की मांग की, लेकिन अदालत ने आरोपी को आजीवन कारावास एवं 50 हजार रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना अदा नहीं करने की स्थिति में आरोपी को एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
