एशियन पेंट्स के ऐप में सेंध लगाकर 1.72 करोड़ की ठगी दौसा साइबर पुलिस ने दो आरोपियों को दबोचा QR कोड का अनुमान लगाकर लगाया चूना

दौसा साइबर थाना पुलिस ने तकनीकी कौशल का परिचय देते हुए एशियन पेंट्स कंपनी के ‘मास्टरस्ट्रोक’ ऐप के साथ हुई 1.72 करोड़ रुपये की डिजिटल धोखाधड़ी का खुलासा किया है। पुलिस ने इस मामले में लालसोट उपखंड के डीडवाना कस्बा निवासी दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिन्होंने बिना पेंट खरीदे ही रिवॉर्ड पॉइंट हासिल कर कंपनी को भारी आर्थिक नुकसान पहुंचाया। कंपनी के ‘Masterstokes’ प्रोग्राम के तहत असली पेंटर्स को उत्पाद खरीदने पर 12-15 अंकों का एक क्यूआर कोड (QR Code) दिया जाता है, जिसे स्कैन करने पर रिवॉर्ड पॉइंट मिलते हैं। आरोपियों ने इस सिस्टम की कमजोरी पकड़ी और बिना उत्पाद खरीदे ही “ट्रायल एंड एरर” पद्धति अपनाई। उन्होंने गणितीय अनुमान लगाकर फर्जी क्यूआर कोड जनरेट किए और उन्हें कंपनी के ऐप में फीड कर कुल 1,72,86,297 रुपये अपने बैंक खातों में ट्रांसफर कर लिए। एशियन पेंट्स के एसोसिएट जनरल मैनेजर की रिपोर्ट पर साइबर थाना डीएसपी बृजेश कुमार मीना के नेतृत्व में विशेष टीम गठित की गई। पुलिस ने एनपीसीआई (NPCI) और विभिन्न बैंकों से डेटा प्राप्त किया। डेटा माइनिंग और ट्रांजेक्शन पैटर्न के विश्लेषण के दौरान पुलिस की सुई दौसा के डीडवाना क्षेत्र पर टिकी। तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने दबिश देकर अनिल कुमार सैनी और विष्णु सैनी (निवासी ढाबा की ढाणी, लालसोट) को गिरफ्तार कर लिया। जांच में यह भी पता चला है कि धोखाधड़ी की इस रकम का एक बड़ा हिस्सा दौसा जिले के खातों में ट्रांसफर किया गया था, जिसमें लालसोट क्षेत्र के कुछ लोगों की संलिप्तता सामने आई है। इस मामले में अभी और भी कई आरोपियों के नाम सामने आने की संभावना है।
इस जटिल साइबर मामले को सुलझाने में कांस्टेबल भाग सिंह की विशेष भूमिका रही। पुलिस ने आरोपियों के पास से वारदात में प्रयुक्त मोबाइल फोन भी जब्त किए हैं। अब पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या इस गिरोह में कंपनी का कोई तकनीकी जानकार भी शामिल था या इन युवाओं ने खुद ही इस डिजिटल सेंधमारी का तरीका ईजाद किया।
