नांगल अभयपूरा ग्राम में रामकथा में शिव-पार्वती विवाह के प्रसंग पर भाव विभोर हुए श्रद्धालु

लालसोट. उपखण्ड के नांगल अभयपुरा गांव के सीताराम मंदिर प्रांगण में जारी नव दिवसीय संगीतमय श्री राम कथा के द्वितीय दिवस में कथा व्यास पं. कपिल जी वशिष्ठ ने भगवान शिव एवं माता सती के दिव्य प्रसंगों का अत्यंत मार्मिक एवं भावपूर्ण वर्णन किया। कथा के दौरान कथा वाचक ने बताया कि भगवान शिव का विवाह माता सती के साथ केवल एक वैवाहिक संबंध नहीं, बल्कि आत्मा और परमात्मा के मिलन का प्रतीक है। शिवजी का वैराग्य और सती जी की अटूट भक्ति इस प्रसंग में स्पष्ट झलकती है। उन्होंनराजा दक्ष का प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने बताया कि अहंकार किस प्रकार मनुष्य के पतन का कारण बनता है। राजा दक्ष ने भगवान शिव का अपमान कर यज्ञ में उन्हें आमंत्रित नहीं किया, जिससे माता सती को अत्यंत दु:ख हुआ। कथा वाचक ने माता सती का आत्मदाह प्रसंग अत्यंत भावुक वातावरण में सुनाया गया, जिसमें बताया गया कि जब अपमान सहन नहीं हुआ तो सती जी ने योगाग्नि द्वारा अपने शरीर का त्याग कर दिया। इस प्रसंग से यह संदेश मिलता है कि जहां भगवान का अपमान हो, वहां रहना उचित नहीं। कथा व्यास जी ने समझाया कि इस प्रसंग के माध्यम से हमें अहंकार का त्याग, भक्ति की दृढ़ता और भगवान के प्रति श्रद्धा बनाए रखने की प्रेरणा मिलती है। कथा के दौरान भगवान शिव-पार्वती विवाह की सजीव झांकी सजाई गर्ई। भजन-कीर्तन से वातावरण भक्तिमय हो गया और श्रद्धालु भाव-विभोर होकर कथा का रसपान करते रहे। कथा के विराम पर आरती एवं प्रसाद वितरण किया गया।
