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जयुपर के प्रदूषित पानी से मोरेल बांध लबालब, किसानों में आक्रोश, मिटिंग का आयोजन कर लिया विशाल महापंचायत का लिया निर्णय

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जयुपर के प्रदूषित पानी से मोरेल बांध लबालब, किसानों में आक्रोश, मिटिंग का आयोजन कर लिया विशाल महापंचायत का लिया निर्णय

लालसोट. उपखण्ड के कांकरिया गांव में मोरेल नदी पर बना ऐशिया महाद्वीप का सबसे बड़े कच्चे डेम मोरेल बांध मानसून पूर्व ही जयपुर की द्रव्यती नदी से बहकर आ रहे फैक्ट्रियों का घातक केमिकल व प्र्रदूषित जल से लबालब हो गया है। इस विशाल बांध की कुल भराव क्षमता 30 फीट 5 इंच है और वर्तमान जल का स्तर 29 फीट 4 इंच तक पहुंच गया है। मोरेल बांध पर बने इस गंभीर पर्र्यावरणीय संकट को लेकर अब दौसा व सवाई माधोपुर जिलेे के दर्जनों गांवों में आम जन व किसान चिंितत होने लगे है एवं जयपुर शहर के अमानीशाह के नाले के साथ सांगानेर क्षेत्र के रंगाई-छपाई कारखानों से निकलने वाले दूषित और रसायनों से युक्त पानी के मोरेल बांध में लगातार पहुंचने के खिलाफ ग्रामीणों ने आवाज बुंलद करना शुरू कर दिया है। शनिवार सुबह बांध के समीपवर्ती भेडोली गांव के राजकीय विद्यालय परिसर में दौसा एवं सवाई माधोपुर जिले के कई गांवों के किसान प्रतिनिधियों की एक आपात बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में आगामी 1 जुलाई को मोरेल बांध पर एक विशाल महापंचायत का आयोजन करने का सर्वसम्मति से निर्र्णय लिया गया, जिसमें दौसा और सवाई माधोपुर जिले के सैकड़ों गांवों के हजारों किसान और ग्रामीण हिस्सा लेंगे। मिटिंग में वक्ताओं ने कहा कि जयपुर की ओर से आ रहे केमिकल युक्त दूषित पानी को तत्काल प्रभाव से मोरेल बांध में आने से रोका जाए, इस गंदे पानी के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जाए और इसे बांध में गिरने से पहले ही किसी अन्य स्थान पर डायवर्ट किया जाए। बैठक में द आगामी रणनीति के लिए 21 जनों की एक कमेटी का गठन किया गया है एवं 29 जून को लालसोट व बौली में उपखण्ड अधिकारियों को ज्ञापन देने का भी निर्णय लिया गया है।

किसान से लेकर पर्यावरणविद् सभी चिंतित

बांध केे इतिहास में पहली बार बन रहे इस दृश्य पर खुशी मनाने के बजाय स्थानीय ग्रामीण और पर्यावरणविद् चिंतित हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक औद्योगिक अपशिष्ट मिश्रित पानी के संग्रहण से जल में रासायनिक तत्वों की मात्रा बढ़ सकती है, जिससे उसका उपयोग कृषि और अन्य कार्यों के लिए चुनौतीपूर्ण बन सकता है,साथ ही यदि प्रदूषित पानी का उपयोग लगातार सिंचाई में किया जाए तो भूमि की भौतिक एवं रासायनिक संरचना प्रभावित हो सकती है। वही दूसरी ओर प्रदूषित पानी के कारण अब यहां से जलीव पक्षियों ने भी दूरी बनाना शुरू कर दिया है।

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