‘वंदे मातरम होने पर दिल पर भारत रखता हूं’ , अनुराग 31 के अंतर्गत आयोजित हास्य कवि सम्मेलन में खूब लगे ठहाके, आधी रात बाद भी जमें रहे श्रोता

लालसोट. अनुराग सेवा संस्थान अनुराग -31 के अन्तर्गत आयोजित अखिल भारतीय हास्य कवि सम्मेलन में देश के कई ख्यातनाम कवियों ने हास्य, व्यंग्य, ओज और श्रृंगार रस से भरपूर रचनाएं प्रस्तुत कर श्रोताओं को कई घंटों तक बांधे रखा। पूरे आयोजन के दौरान पंडाल तालियों और ठहाकों से गूंजता रहा। कवि सम्मेलन साहित्य, हास्य और सामाजिक चेतना का अद्भुत संगम देखने को मिला, जिसके चलते आधी रात बाद भी सैकड़ों की संख्या में श्रौता डटे रहे। कवि सुनहरी लाल तुरंत ने बेटियों के महत्व को उजागर करते हुए अपनी मार्मिक रचना प्रस्तुत करते हुए सुनाया कि घर के आंगन की तुलसी है ये बेटियां। उनकी इस प्रस्तुति ने सभी श्रौताआं को भावुक कर दिया और तालियां बजा कर बेटियों के सम्मान का संदेश दिया। रोहित चौधरी ने देशभक्ति से ओतप्रोत रचना सुनाते हुए गाया कि वंदे मातरम होने पर दिल पर भारत रखता हूं। हास्य-व्यंग्य के कवि रामबाबू सिकरवार ने अपनी पैरोडी प्र्रस्तुती करते हुए जो वतन की खातिर मिटे उनको सलाम है,जांबाज सैनिकों को कोटिश प्रणाम है, आतंकवादियों को घर में घुसकर मार कर, दुनिया को बता दिया यह हिंदुस्तान है,ऑपरेशन अपना सफल सिंदूर हो गया। सुरेंद्र सार्थक ने अपने तीखे व्यंग्य के माध्यम से समाज की विडंबनाओं को उजागर करते हुए सुनाया कि वाह रे मेरे समाज, तेरी परंपरा,एक नारी की दुनिया यूं ही खत्म हो गई, जब तलक लाली लहू की एक भी कतरे में है,कौन कहता है वतन की आबरू खतरे में है। डॉ.अंजीव अंजुम ने गंभीर और विचारोत्तेजक कविता प्रस्तुत करते हुए सुनाया कि झील का पानी जहां छिछला मिला है,हंस की जगह वहां बगुला मिला है, आम फुटपाथों पर बैठी हर गजल का आदमी,सच्चाई का मतलब मिला है। फिरोजाबाद से आए गीतकार यशपाल यश द्वारा आज से पचास साल पहले का ग्रामीण परिदृश्य और चूडिय़ों की महत्ता प्रतिपादित करते हुए प्रस्तुत किए गए गीत ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कवि सम्मलन का उद्घाटन मुख्य अतिथि पुलिस उपाधीक्षक दिलीप तन्मय व कवियों दीप प्रज्वलन के साथ किया। वरिष्ठ गीतकार यशपाल यश ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की।
