लालसोट के मोरेल बांध पर शीत ऋतु प्रारंभ होते ही पहुंचने लगे प्रवासी पक्षी

शीत ऋतु के प्रारंभ होने के साथ ही मोरेल बांध पर प्रवासी पक्षियों का आना शुरू हो गया है । सैंकड़ों की संख्या में रोज़ी स्टार्लिंग, जिसे गुलाबी मैना या पैस्टर रोज़ियस भी कहा जाता है,बांध के किनारे कैर की झाड़ियों और खेतों में झुंड में नजर आती है।पक्षी विशेषज्ञ और राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय लालसोट के प्राचार्य प्रोफेसर सुभाष पहाड़िया के अनुसार रोजी स्टर्लिंग एक सुंदर और आकर्षक प्रवासी पक्षी है। इसके शरीर का ऊपरी भाग काला व चमकीला होता है जबकि छाती और पेट हल्के गुलाबी रंग के होते हैं। नर पक्षी में यह रंग अधिक स्पष्ट दिखता है।
रोज़ी स्टार्लिंग का मुख्य प्रजनन क्षेत्र दक्षिण-पूर्वी यूरोप और पश्चिमी एशिया है — विशेषकर रूस, यूक्रेन, कजाखस्तान और
तुर्कमेनिस्तान के शुष्क घास के मैदान। शीतकालीन प्रवास काल में यह पक्षी भारत, पाकिस्तान, श्रीलंका और नेपाल तक पहुंचता है।
भारत में इसका आवास — खुले मैदान, कृषि क्षेत्र, चने-बाजरे-ज्वार की फसलें, तालाबों, नहरों और ग्रामीण क्षेत्रों के आस-पास
राजस्थान, गुजरात, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र में यह बहुतायत से दिखाई देता है। सर्दियों के दौरान यह मोरेल बांध जैसे जलाशयों के आसपास झुंडों में देखा जा सकता है। यह हमेशा बड़े झुंडों में उड़ता और बैठता है और शाम के समय सैकड़ों पक्षी एक साथ किसी पेड़ पर इकट्ठे होकर शोरगुल करते हैं।
ये कीटभक्षी होते हैं। विशेषकर टिड्डियाँ इनका मुख्य भोजन हैं, इसलिए ये कृषि-क्षेत्रों में किसानों के लिए उपयोगी माने जाते हैं।प्रजनन काल इनके मूल क्षेत्र (कजाखस्तान-मंगोलिया) में गर्मियों में होता है। ये चट्टानों की दरारों या मिट्टी की ढलानों में घोंसले बनाते हैं। ये बहुत सक्रिय और मधुर आवाज़ वाले होते हैं, जो एक साथ गाना गाते हैं।
प्रोफेसर सुभाष पहाड़िया के अनुसार रोज़ी स्टार्लिंग एक दीर्घ दूरी का प्रवासी पक्षी है। जो अपने मूलप्रजनन स्थल मध्य एशिया (कजाखस्तान, रूस, मंगोलिया, अफगानिस्तान) से ईरान → अफगानिस्तान → पाकिस्तान → और भारत में प्रवास करता है।
भारत में इनका प्रवास काल जुलाई से नवंबर के बीच आगमन तथा मार्च–अप्रैल तक पुनः अपने मूल स्थानों की और प्रवास करते है।
ये पक्षी वापसी में उत्तर-पश्चिम दिशा में (भारत → पाकिस्तान → ईरान → मध्य एशिया को जाते है।
रोज़ी स्टार्लिंग को राजस्थान में “टिड्डी खोर मैना” भी कहा जाता है, क्योंकि ये फसलों को बचाते है।
जब ये आकाश में उड़ते है काले बादल की तरह दिखाई देते हैं — यह दृश्य राजस्थान के ग्रामीण इलाकों में अक्सर देखा जाता है
रोज़ी स्टार्लिंग भारत के शीतकालीन महीनों में आने वाला एक आकर्षक प्रवासी पक्षी है। इसकी सामूहिक उड़ानें और गुलाबी चमक इसे पक्षी-प्रेमियों और फोटोग्राफरों के बीच अत्यंत लोकप्रिय बनाती हैं। प्रोफेसर पहाड़िया पिछले कई सालों से मोरेल बांध की जैव विविधता के संरक्षण और जागरूकता के लिए कार्य कर रहे है उनके अनुसार यह पक्षी
न केवल पर्यावरण का एक सुंदर प्रतीक है बल्कि कृषि-संतुलन और जैव-विविधता में भी अहम योगदान देता है। हालांकि इस बार बांध पर प्रवासी पक्षि प्रवास पर देरी से पहुंचे है उसका मुख्य कारण जलवायु परिवर्तन और बांध में बढ़ते प्रदूषित जल के कारण भी इनकी संख्या कम हो सकती है।
