लालसोट में एडीजे कोर्ट ने दिया ऐतिहासिक फ़ैसला, विवाहिता के अपहरण, गेंप रेप व मर्डर के दो दोषियों को फांसी की सजा, चार साल पूर्व का है मामला, लालसोट एडीजे रितू चौधरी ने सुनाया निर्णय

लालसोट. अपने घर से पीहर जाने के लिए निकली एक लाचार, निर्बल एवं बेबस विवाहिता का अपहरण करने के बाद उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म करने व बाद में महिला के ही स्कार्र्फ से उसका गला दबा कर जान सेे मार कर शव को कुए में डालने वाले दो दरिन्दों को लालसोट के एडीजे कोर्ट ने फांसी सजा सुनार्ई है। करीब चार साल पूर्व अप्रेल 2022 मेें हुए इस बहुचर्चित प्रकरण में गुरुवार को अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश रितु चौधारी ने दोनो आरोपी कालूराम मीना एवं संंजू मीना को दोष सिद्ध करार देने के बाद सजा के बिन्दुओं पर भी बहस पर दोनो पक्षों की दलील सुनने के बाद सजा पर शुक्रवार तक अपना फैसला सुरक्षित रखा था। दोपहर करीब सवा बारह बजे जब एडीजे रितु चौधरी ने रामगढ पचवारा थाना क्षेत्र केे सिसोदिया गांव निवासी दोनो आरोपी कालूराम मीना व संजू मीना को मृत्य होने तक फांसी के फंदें पर लटकाने की सजा सुनार्ई तो कोर्ट परिसर तालियों से गूंज उठा। मृतका के परिजनों एवं मौजूद सभी वकीलों ने न्यायालय के इस फैसले को ऐतिहासिक करार देेते हुए इसका स्वागत किया।
गूंजती है आज भी फिजा में हजारों सिसकियां…
एडीजे रितू चौधरी ने दोनो दरिन्दों को फांसी का निर्र्णय सुनाते हुए एक कविता के माध्यम से समाज में बेटियों की हालात एवं उनकी सुरक्षा का जिक्र करते हुए कई सवाल खड़े भी किए। न्यायाधीश ने निर्णय में अपनी कविता सुनाते हुए कहा कि- गूंजती है आज भी फिजा में हजारों सिसकियां, घुट घुट कर तड़पती है इस समाज में बेटियां, किस्सा बलात्कार का आज फिर अखबार में छपेगा, एक बेटी के खून से आज फिर अख़बार सनेगा, क्या था कसूर मेरा, क्या बेटी होना ही कसूर था मेरा, कैसे जिए इस समाज में नारी, जहां दरिंदे बसते हो, भेडिय़ों ने जहा इंसान के चेहरे पहने हो, आखिर कब तक नारी की इज्जत यूं तार तार होगी, आखिर कब इस समाज की गलियां बेटियों के लिए सुरक्षित होगी।
