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अनुराग- 31 में गीता व्याख्यान माला एवं 3100 गीता पुस्तक वितरण का शुभारंभ, संत रामदास ने कर्म ज्ञान एवं भक्ति योग का सन्देश 

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गीता कर्म, ज्ञान और भक्ति योग का सामंजस्य* – संत श्री रामदास

अनुराग 3100 में गीता व्याख्यान माला एवं 3100 गीता पुस्तक वितरण का शुभारंभ

अनुराग सेवा संस्थान लालसोट द्वारा स्थापना के 31 वर्ष पूर्ण होने पर अनुराग- 31 के अंतर्गत आयोजित कार्यक्रम में शामिल गीता व्याख्यान माला एवं गीता पुस्तक वितरण कार्यक्रम का शुभारंभ सोमवार को गीता जयंती के पावन अवसर पर किया गया।

आदर्श विद्या मंदिर, श्यामपुरा रोड लालसोट में आयोजित इस कार्यक्रम में लालसोट संत समाज के अध्यक्ष संत श्री रामदास जी महाराज ने कहा कि “आत्मज्ञान ही मोक्ष है।” गीता के माध्यम से श्रीकृष्ण ने यह सिखाया है कि आत्मज्ञान ही हमें संसार के दुखों से मुक्त कर सकता है, और यही मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग है। मोक्ष की इस यात्रा में श्रीकृष्ण हमें अपनी इन्द्रियों को नियंत्रित करने, मोह-माया से मुक्त होने, और सच्चे ज्ञान की ओर बढ़ने का मार्गदर्शन देते हैं। गीता कर्म योग, ज्ञान योग , और भक्ति योग का सामंजस्य है, जिसका अंतिम लक्ष्य मोक्ष प्राप्त करना है। इसमें आत्मा की नश्वरता, कर्मों के फल के प्रति निस्वार्थ भाव और मन को नियंत्रित करने की शिक्षा शामिल है। काम, क्रोध, लोभ ये तीन नरक के द्वार हैं और व्यक्ति के पतन का कारण बनते हैं। मनुष्य को आसक्ति और विरक्ति के प्रभाव से ऊपर उठकर जीवन जीना चाहिए, तभी शांति मिल सकती है।

सी बी ई ओ सत्य नारायण मीना ने कहा कि गीता के उपदेशों में निष्काम कर्म, आत्म-विश्वास, और मोह-माया से मुक्ति जैसे कई सारगर्भित संदेश हैं, जो हमारा जीवन की चुनौतियों का सामना करने में मदद करते हैं। अच्छे संस्कार चरित्र निर्माण में सहायक होते हैं।उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति खुद पर विश्वास करता है, वह जो चाहे बन सकता है। अत्यधिक मोह दुख का कारण बनता है, और अहंकार से मुक्ति पाने पर व्यक्ति अपने वास्तविक स्वरूप को पहचान सकता।

राजेश पायलट पी जी महाविद्यालय लालसोट के प्राचार्य डॉ सुभाष पहाड़िया ने कहा कि अनुराग सेवा संस्थान द्वारा किए गए कार्य सराहनीय है। व्यक्ति को बिना फल की इच्छा किए अपना कर्म करना चाहिए। कर्म पर ही मनुष्य का अधिकार है, फल पर नहीं व्यक्ति को आत्मा की अमरता और नश्वरता को समझना चाहिए। आत्मा को कोई शस्त्र या आग नष्ट नहीं कर सकती। सभी धर्मों को त्याग कर, केवल ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण और प्रेम करना चाहिए।

 

संस्थान सचिव श्यामसुंदर शर्मा ने बताया कि इसके अंतर्गत हमारा उद्देश्य युवा पीढ़ी को गीता के मर्म से अवगत करवा कर उन्हें आध्यात्मिकता से जोड़ना है ताकि नवीन पीढ़ी के संस्कारों में आ रही कि गिरावट को रोका जा सके और राष्ट्र और समाज के लिए सुसंस्कृत नागरिकों का निर्माण किया जा सके। संस्थान की गतिविधियों पर भी प्रकाश डाला।

इस अवसर पर संस्थान द्वारा एक से एक गीता पुस्तकों का वितरण भी किया गया । मंच संचालन प्रधानाचार्य हंसराज शर्मा और निर्मला बड़ाया ने किया। संस्थान अध्यक्ष अंशुल सोनी ने आभार व्यक्त किया।

इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत व्यवस्था प्रमुख कैलाश गुप्ता, जिला प्रचारक विश्वेंद्र , विश्राम सैनी पार्षद चिराग जोशी, मुकेश लाल मीना, अमन गुप्ता, राधेश्याम शर्मा , बाबू लाल शर्मा, मीठा लाल मीना, प्रकाश शर्मा, ऋषि गौतम, हीरा लाल सैनी, रविन्द्र महावर , हनुमान शर्मा, पूजा शर्मा, मीनाक्षी सैनी, बर्फी सैनी, राहुल शर्मा, अभिषेक शर्मा, सहित कई लोग उपस्थित रहे।

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